विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त, यात्रियों को उठानी पड़ रही भारी दिक्कतें
भागलपुर: विक्रमशिला सेतु की क्षति से जनजीवन अस्त-व्यस्त, मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण और मरम्मत के दिए सख्त निर्देश
भागलपुर जिले के महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद आम जनता की कठिनाइयां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस प्रमुख सेतु पर आवागमन बाधित होने के कारण प्रतिदिन हजारों मुसाफिरों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। संकट की इस घड़ी में जिला प्रशासन ने राहत प्रदान करने के उद्देश्य से गंगा घाटों पर नावों के संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की है। इन घाटों पर सुरक्षा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए दंडाधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन की प्राथमिकता वर्तमान में यात्रियों को सुरक्षित तरीके से नदी पार कराना और सेतु की मरम्मत के काम को गति देना है।
नाव के सफर में भारी भीड़ और अव्यवस्था से जूझ रहे मुसाफिर
यद्यपि प्रशासन ने नावों के जरिए लोगों को पार लगाने का प्रयास किया है, लेकिन धरातल पर स्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। प्रशासन ने नाव चालकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं और निर्धारित दर पर ही किराया वसूलें, फिर भी यात्रियों को लंबी कतारों और अव्यवस्था से दो-चार होना पड़ रहा है। घाटों पर उमड़ती भारी भीड़ के कारण लोगों को नाव पकड़ने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है जिससे उनके दैनिक कार्य और व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि नाव का विकल्प केवल तात्कालिक है और इससे बड़ी आबादी की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लिया जायजा और बहाली के लिए दिए निर्देश
पुल की गंभीर स्थिति और जनता की परेशानी को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। हवाई मार्ग से सेतु की स्थिति का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ बरारी पुल घाट के पास बैठक की। इस दौरान जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव सहित कई बड़े अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पुल निर्माण विभाग की टीम के साथ समन्वय बिठाकर मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए ताकि प्रदेश के इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को बिना किसी विलंब के दोबारा चालू किया जा सके।
स्थायी समाधान की प्रतीक्षा और प्रशासन की भविष्य की रणनीति
क्षेत्र के लोग वर्तमान में की गई वैकल्पिक व्यवस्थाओं को नाकाफी मान रहे हैं और जल्द से जल्द पुल की मरम्मत कर स्थायी समाधान की गुहार लगा रहे हैं। जिलाधिकारी ने इस संबंध में जानकारी दी कि विभाग की तकनीकी टीम निरंतर कार्य कर रही है और विशेषज्ञों की राय के आधार पर बहाली की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि पुल की सुरक्षा से बिना कोई समझौता किए इसे जल्द से जल्द हल्के वाहनों के लिए खोला जाए। जब तक सेतु का संचालन सामान्य नहीं हो जाता, तब तक गंगा के विभिन्न घाटों पर सुरक्षा प्रबंधों को और अधिक सख्त करने और नावों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
पुल निर्माण विभाग की सक्रियता और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर
सेतु की मरम्मत के लिए पुल निर्माण विभाग के अभियंताओं की विशेष टीम दिन-रात तकनीकी खामियों को दूर करने में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद काम की गति में तेजी आई है और आधुनिक मशीनों के जरिए क्षति का आकलन कर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा के दृष्टिकोण से लगाए गए प्रतिबंधों का पालन करें। सरकार की कोशिश है कि भविष्य में ऐसी तकनीकी खामियां दोबारा न आएं, इसके लिए पुल के बुनियादी ढांचे की मजबूती की भी गहन जांच की जा रही है ताकि लंबे समय तक सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके।


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